सुबह के पांच बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर टिमटिमाती हेड लाइट वाली दर्जनों गाड़ियां कतारबद्ध खड़ी होने लगी थीं। महीनों से घरों में कैद रहे लोग इन गाड़ियों से उतर कर ऊंची-ऊंची उड़ाने भरने की उत्सुकता लिए एयरपोर्ट में दाखिल हो रहे थे।

सुबह 5 बजे से ही एयरपोर्ट के बाहर गाड़ियों की कतार नजर आई।

आज पूरे दो महीने बाद देश के इस दूसरे सबसे बड़े एयरपोर्ट पर रौनक लौटी है। लेकिन ऐसे सैकड़ों लोग एयरपोर्ट के बाहर ही मौजूद थे जिन्हें यहां पहुंचने के बाद ही मालूम चला है कि उनकी फ्लाइट्स रद्द हो चुकी हैं। यहां आने से पहले न तो इन लोगों फ्लाइट के रद्द होने सम्बन्धी कोई एसएमएस आया और न ही कोई कोई ईमेल या फोन।

जिन लोगों की किस्मत अच्छी है और जिनकी फ्लाइट रद्द नहीं हुई हैं, वे लोग कतार बनाए एयरपोर्ट के अलग-अलग गेट पर खड़े हो गए हैं। आज लोगों की यह कतारें आम दिनों से एकदम अलहदा हैं। अव्वल तो एयरपोर्ट पर नजर आने वाली रंग-बिरंगी विविधता पर कोरोना की इस महामारी ने एकरंगी चादर डाल दी है। मास्क से ढके चेहरे जब सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करते हुए निश्चित दूरी बनाए धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं तो नीरस रोबॉट से नजर आते हैं।

संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट पर कई तरह के नए इंतजाम किए गए हैं।

सोशल डिस्टैंसिंग मेंटेन करने के लिए जमीन पर जगह-जगह निशान बनाए गए हैं।

मसलन, ऑटो-सेंसर वाले हैंड-सैनिटाइजर जगह-जगह लगाए गए हैं, सोशल डिस्टैंसिंग बनाए रखने के लिए जमीन पर निशान बनाए गए हैं, बोर्डिंग पास के लिए ऐसी कई मशीने एयरपोर्ट के बरामदे पर ही लगा दी गई हैं जिनसे लोग खुद ही अपने पास का प्रिंट ले सकें और कंधे पर लाउड स्पीकर लटकाए सुरक्षाकर्मी लगातार यात्रियों को आगाह कर रहे हैं कि उन्हें संक्रमण से बचने के लिए क्या-क्या करना है. बोर्डिंग के समय सभी यात्रियों को एक किट भी दी जा रही है, जिसमें फेस मास्क, फेस शील्ड और सैनिटाइजर का पाउच रखा है।

एयरपोर्ट में दाखिल होने से पहले ही सभी यात्रियों का सामान सैनिटाइज किया जा रहा है। चेक-इन वाले बड़े बैग स्कैनिंग मशीने सरीखी एक बेल्ट पर डालकर सैनिटाइज किए जा रहे हैं जबकि लोगों के हैंड-बैग को सैनिटाइज करने के लिए कुछ कर्मचारी स्प्रे लिए तैनात खड़े हैं।

सीटिंग अरेंजमेंट में भी सोशल डिस्टैंसिंग को फॉलो किया जा रहा है।

एयरपोर्ट में दाखिल होने के लिए सभी लोगों के ई-टिकट, बोर्डिंग पास और पहचान पत्र गेट पर ही जांचें जा रहे हैं। नया ये है कि इस जांच के बाद कुछ ही कदम बढ़ने पर लोगों का बॉडी टेम्प्रेचर मापा जा रहा है और साथ ही आरोग्य सेतु एप पर उनका स्टेटस भी जांचा जा रहा है। कमलेश जैसे कई लोगों के लिए जांच का यही चरण बेहद मुश्किल बन पड़ा है क्योंकि कल ही उनका स्मार्टफोन टूट कर ख़राब हुआ है। अब उनके पास एप डाउनलोड करने का विकल्प नहीं है।

जांचकर्ता उन तमाम लोगों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने को बोल रहे हैं जिन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया है। लेकिन कमलेश की स्थिति को समझते हुए वे उन्हें एयर इंडिया की तरफ से आई एक ऑटो-जेनरेटेड ईमेल का प्रिंट आउट दिखाने पर अंदर जाने देते हैं। यह ईमेल उन तमाम लोगों को मिला है जिन्होंने अपनी स्वस्थ होने का दावा ऑनलाइन फॉर्म भरकर किया था।

सुरक्षा की इस पहली से कड़ी से अंदर आने के बाद जो दूसरी कतार नजर आती है, वह सामान के चेक इन की है। इसके लिए भी नए इंतजाम हैं। सामान पर लगने वाल टैग आज लोगों को खुद ही ऑनलाइन बनाकर निकालना है और फिर खुद ही उसे अपने सामान पर लगाना है। जिन्होंने ऐसा नहीं किया है, उनके पास विकल्प है कि वे एक कोरे कागज पर अपना पीएनआर नम्बर लिखकर उसे ही सामान पर चिपका दें।

ये फॉर्म यात्रियों को भरना पड़ रहा है। यह क्वारैंटीन करने पर होने वाले खर्चे की स्वीकारोक्ति है।

इसी काउंटर पर दो अन्य फॉर्म भी यात्रियों से भरवाए जा रहे हैं। एक फॉर्म पर लोगों को यह स्वीकारोक्ति देनी है कि यदि उन्हें क्वॉरैंटीनकिया जाता है तो उसका खर्च वे खुद उठाएंगे, यदि उन्हें गंतव्य राज्य वापस भेज देता है तो इसका खर्च भी वे खुद उठाएंगे और यदि एयरलाइन पर कोई जुर्माना लगता है तो ऐसा जुर्माना भी इन यात्रियों से ही वसूला जाएगा।

इस फॉर्म पर हस्ताक्षर करवा कर एयरलाइन अपना पल्ला झाड़ते हुए जब यात्रियों को आगे बढ़ाती है तो एक अन्य फॉर्म उन्हें थमा दिया जाता है। यह दूसरा फॉर्म इस बात की स्वीकारोक्ति है कि यात्रियों को कोरोना के कोई लक्षण नहीं हैं, वे किसी कंटेनमेंट जोन से नहीं आ रहे हैं आदी।

इन दो फॉर्म में से एक एयर लाइन वाले अपने पास रख लेते हैं और एक यात्री को ही दे दिया जाता है। यहां से यात्रियों को फ्रिस्किंग के लिए भेजा जा रहा है। फ्रिस्किंग के समय मिलने वाली हर ट्रे को लगातार सैनिटाइज किया जा रहा है और लोगों की जांच के लिए मेटल डिटेक्टर भी इस तरह बनाया गया है कि जांच करने वाल तीन फीट की दूरी से ही यह जांच कर सके।

इन तमाम जांचों से गुजारने के बाद जब यात्री अपने बोर्डिंग गेट की तरफ बढ़ रहे हैं, तब भी उनके बीच उचित दूरी का पूर ध्यान रखा जा रहा है। मास्क में बंधे चेहरों को दूर-दूर रखने के लिए बैठने के सभी इंतजाम ऐसे किए गए हैं कि कोई भी दो लोग साथ न बैठ सकें। एस के आकार में बने उन खूबसूरत काउच को बीच से तोड़ दिया गया है जिसमें कभी दो-दो लोगों के जोड़े बैठा करते थे। तीन-तीन लोगों वाली बेंच में भी बीच की सीट पर निर्देश चस्पा कर दिए गए हैं कि इस सीट को खाली रखा जाए।

एयरपोर्ट पर स्टाफ से लेकर यात्री तक फेस मास्क, फेस शील्ड लगाए नजर आ रहे हैं।

एयरपोर्ट पर मौजूद सफाइकर्मियों से लेकर स्टाफ और यात्री तक सभी फेस मास्क, फेस शील्ड और पीपीई सूट पहने नजर आ रहे हैं। पूरे एयरपोर्ट का सिर्फ एक ही हिस्सा ऐसा है जहां लोग बिना मास्क के सांसें लेते दिखते हैं। यह हिस्सा है – ‘स्मोकिंग रूम’ यानी एयरपोर्ट के जिस हिस्से में हवा सबसे जहरीली है, लोगों के मास्क सिर्फ वहीं उतरे हुए दिखते हैं।

दिल्ली की लगातार विकराल हो रही गर्मी में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी बुर्के जैसी पॉलीथीन ओढ़े लोगों की जांच कर रहे हैं, हाथों में रबर ग्लव्ज पहने पसीने में तर हुए जा रहे हैं और पूरी विनम्रता से लोगों को सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करने को निर्देशित कर रहे हैं, लेकिन ऐसा तभी तक हो रहा है जब तक लोग हवाई जहाज में दाखिल नहीं हो जाते।

दाखिल होने के बाद लोगों को कंधे से कंधे टकराते हुए ही जहाज में बैठाया जा रहा है। यह देखकर स्वाभाविक सवाल उठता है कि जब जहाज में सोशल डिस्टैंसिंग को धता बताते हुए ऐसे भर दिया जा रहा है तो उन तमाम सावधानियों का कितना औचित्य रह जाता है जो एयरपोर्ट पर बरती जा रही हैं।

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